Ek true Sex kahani – Hindi sex stories

मेरा नाम अनुज है या मेरी भान का नाम निधि है मेरा गांव यूपी के जिला लखीमपुर खीरी के गांव निघासन में है अब मेरी सीधी कहानी पर आता हूं मेरी भान मुझसे 7 साल बाद है ये कहानी उस समय की है जब मेरा एडमिशन 11वीं कक्षा में हुआ था ठंड का महीना था मैंने अपनी भान को नगी कई बार देखा वो स्कूल में पढ़ने जाती थी जब स्कूल से वापस आती थी तो मैक्स पहनती थी मैक्स के नीचे केवल पैंटी या ब्रा पहनती थी स्तन जादा बड़े नहीं थे 32 के थे बारिश का महीना था हम या निधि दे दी पास एक चारपाई पर लेटते थे या मम्मी या बहन टीन सीड के नीचे लेती थी पापा कोई काम से भर गए थे

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मेरी आँख कुली तो देखा की देदी की मैक्सी घुटनो तक थी मने देदी का मोबैल उठाया या सैलेंट पर लगया या टॉर्च जली देखा तो देदी की पैंटी दिख रही थी मेरी हिम्मत नहीं हुई की देदी मैक्सी उठा कर देखने की मुझको नींद नहीं आई या मने पर से देदी की मैक्सी को उनकी कमर तक किया या उठ कर बैठा या फ़िर टॉर्च जलाया डेका कि देदी को पीरियड्स आ रहे थे तो देदी ने पैंटी के नीचे पैड लगा रखा था

मने किसी लड़की की इतने पास से पेंटी फैन पास से चोट नहीं देखी थी फिर से मैं सो गया कुछ दिन बाद मेरे एक्सन था मेरी मम्मी या बहन अलग कामरे में सो रही थी या माई निधि दे दी कामरे तो फिर मुझे सुबह का समय 4 बजे उठना था था मैं उठ ब्रश किया या लैंप की रोशनी तेज करके मछरदानी मुझे रजाई ओडकर पड़ाई कर रही है कि मार हट देदी की कमर पर चला गया मुझे लगा कि देदी की मैक्सी कमर से ऊपर है मैंने थोड़ी सी रजाई उठा कर देखी की देदी ने लाल रंग की पैंटी पहन रखी थी मैंने दीदी को थोड़ा हिलाया तो देदी ने कुछ नहीं रिस्पॉन्स नहीं दिया तो मेरी हिम्मत थोड़ी बढ़ी तो मने लैंप नेचाय रख दिया या पेंटी के अंदर हाथ डाला मैंने दीदी की झांटो में टोपी घुमाई या मुझे चूत नहीं मिली

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काफ़ी देर परेशान होने के बाद मैंने फैसला लिया कि चोट तो मिली नहीं तो गांड मार लेता हूं या मैंने रजाई को थोड़ा ऊपर करके अपनी पैंट की चेन खोली या लंड पर थूक लगाया जैसे ही पीछे की पैंटी की साइड की रबर खींची तो मम्मी ने आवाज दी कि उठो सुबह 5:30 बजे हो गए तो माने थोड़ी देर या देदी को सोने दो तो मम्मी ने कुछ नहीं बोला या मने फ़िर से पैंटी की रबर खींची या जसे गांड का चाड दुंध रहा था कि चूत का सुरख मिल गया मने एक छोटी सी उंगली उसने डाली माए ने उंगली निकाली या लंड के टोपी पर थूक लगया चूत के सुरख में फसाया या हल्के से ढका लग्या की दीदी उठ कर बैठ गई मैं डर के मारे कांपने लगा या दे दी मुझे अपनी या खींच कर बोली की चेन खोलो माई डर के मारे कुछ सोच नहीं पाया

माई बोला कोन सी चेन फिर देदी बोली पैंट की तो मैं बोला कि चैन गो खुल गई है तो उन्हें ने मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत में डाला या बोली कि कमर चलोगे की माई ही कमर क्लौंगी क्या मैंने दी को जोर पकड़ लिया या तेज अपनी कमर चलने लगा या मेरी स्पीड तेज हो गई या मेने बहुत देदी की चूत की गहराइयों में से निकल दिया या मेने खा की मेने तो देखा कि लड़की जब फली बार चुदती है तो चिल्लाती है देदी आप तो बिल्कुल नहीं मिलती तो उनको खा माई फली बार तोढ़ी ना चुद रही हूं माई तो कई बार चुद चुकी हूं तो मने फूंचा किसे चुदी हो तो अनहोने खा की सबसे फले कूदाई गोहोडे से मतलब (घोड़े) से तो माने पूंछा कासे तो उन्हें मेरा 12वीं का एग्जाम था, मैं एग्जाम देकर वापस आ गया था कि मेरी नजर गोधे को चोदते हुए पड़ी मेरा आदमी उछलने लगा या मेरे पोर्न लड़की को घोड़े से चोदते हुए देका था मेरा भी आदमी करने लग इक दी शेली के घर पर गई हुई थी या उसके यहां घोड़ा पाला हुआ था या मेरी शाली का फोन आ गया की तुम्हारी मम्मी का एक्सिडेंट हो गया है या वो रोते हुए अपने मामा के यहां चली गई

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या मुझसे बोली कि गोधे का ध्यान रखना, मैं कल आ जाऊंगी, मैं तुरन मैनफोर्स 500 मिलीग्राम की 4 गोलियां, पीस का घोड़े के घास में दाल दी या गोड़े को घास दे दी घास खाने के बाद में घोड़े के आगे के लग्स बंद कर ऊंची बंधी लकड़ी में एफएसए दिया या घोड़े का लंड खड़ा हो गया या माने अपनी चोट मेरे दोस्त के घर से सरसों का तेल लगा लिया या पीछे खम्बे ने मुझे मोटा डंडा बंद दिया या दोनों तांगे डंडे में फसली या जिसने घोड़े की आगाये के जोड़े फासये हमें पर एमएसने अपना सिर रख लिया या घोड़े का लंड अपनी चूत पर रगड़ने लगी जसे ही माने घोड़े के लंड का टोपा चूत के अंदर किया की मेरी तो जान ही निकलने लगी या घोड़ा फुल एग्ज़िट हो गया या उसने एक ही झटके में अपना आधा लंड मेरी चूत में कर दिया, मैं तो बेहोश हो गया या वो मुझे चोदता ही रहा जब मेरी आंख खुली देखा क्या के मेरी चूत में घोड़े का लंड अभी भी फंसा हुआ था या मेरी चूत से खून धार बंद के निका रहा था

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